गंगा सा निर्मल और पावन,
परिसर हरित भव्य मन भावन।
निर्देशनरत कुशल प्रबन्धन,
सफल सतत् अध्ययन–अध्यापन।
सत्य, प्रेम, सौहार्द, समन्वय,
सहिष्णुता, सद्भाव, समर्पण।
जीवन–मूल्य करें नित अर्जित,
राष्ट्र–प्रेम हित करते अर्पण।
सरस्वती का कृपा पात्र है,
मूल्यपरक शिक्षा का आलय।
नवल ज्ञान की है यह ज्योति,
गंगाशील महाविद्यालय।
रचनाकार :
डॉ. एन.एल. शर्मा।